साथ-साथ

Friday, July 8, 2011

रास्ते में आदमी ka बूढ़ा हो जाना स्वाभाविk है

दिवंगत kवि श्रीkanत वर्मा ka  अंतिम kविता संग्रह मगध 1984 में आया था और तब खूब चर्चित भी हुआ था। सत्ता-व्यवस्था से विमर्श kरती kविताओं ke अलावा इस संग्रह में kuछ ऐसी kविताएं भी हैं, जो kवि ke जीवन दर्शन पर भी रोशनी डालती हैं। पढि़ए यह kविता...

जो युवा था/श्रीkanत वर्मा

लौटkaर सब आएंगे
सिर्फ वह नहीं
जो युवा था-
युवावस्था लौटkaर नहीं आती।

अगर आया भी तो
वही नहीं होगा।

पake बाल, झुर्रियां,
जरा, थkaaन
वह बूढ़ा हो चुka होगा।

रास्ते में
आदमी ka बूढ़ा हो जाना
स्वाभाविk है-
रास्ता सुगम हो या दुर्गम

koई क्यों चाहेगा
बूढ़ा kहलाना?

koई क्यों अपने
पke बाल
गिनेगा?

koee क्यों
चेहरे kee सलें देख
चाहेगा चौंkना?

koई क्यों चाहेगा
koई उससे kहे
आदमी kiतनी जल्दी बूढ़ा हो जाता है-
तुम्हीं ko लो!

koई क्यों चाहेगा
ki वह
जरा, मरण और थkaaन kee मिसाल बने।
लौटkaर सब आएंगे
सिर्फ वह नहीं
जो युवा था।

2 comments:

  1. जीवन चक्र का सुन्दर वर्णन .

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