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Friday, March 18, 2011

हालांकि दुनिया कोई बहुत प्रेमपूर्ण नहीं है

आज भी दुनिया बहुत प्रेमपूर्ण नहीं है, बल्कि उसका रवैया अक्सर प्रेमियों के खिलाफ नजर आता है। इसके बावजूद प्रेमियों के चलते ही दुनिया में कुछ बहुत अच्छी चीजें बची हुई हैं। पढि़ए अरविंद श्रीवास्तव की यह कविता-

प्रेमियों के रहने से/अरविंद श्रीवास्तव

प्रेमियों के रहने से
मरे नहीं शब्द
मरी नहीं परंपराएं
कंसर्टों में गाए जाते रहे प्रेमगीत
लिखी जाती रहीं प्रेम कविताएं
बचाए जाते रहे प्रेमपत्र
डोरिया कमीज के कपड़े
मूंगफली के दाने
पार्क व लॉन वाले फूलों को
और बचाया जा सका
उजाले से रात को

प्रेमियों के रहने से
मरी नहीं चार्ली चैपलिन की कॉमेडी
अभिनेत्रियां नहीं हुईं कभी बूढ़ी
चालीस के दशक वाले सहगल के गीतों को
बचाए रखा प्रेमियों ने

प्रेमियों के रहने से एक आदिम सिहरन
जीवित रही अपने पूरे वजूद के साथ
हर वक्त

डाल दिए प्रेमियों ने पुराने और भोथरे हथियार
अजायबघर में

संरक्षित रही विरासत
जीवित रहीं स्मृतियां

आषाढ़ के दिन और पूस की रातें
कटती रहीं बगैर किसी फजीहत के
प्रेमियों के रहने से

प्रेमियों के रहने से
आसान होती रहीं पृथ्वी की मुश्किलें
और अच्छी व उटपटांग चीजों के साथ
बेखौफ जीती रही पृथ्वी।

2 comments:

  1. परिवार सहित होली की बहुत-बहुत मुबारकबाद... हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  2. आपको एवं आपके परिवार को होली की बहुत मुबारकबाद एवं शुभकामनाएँ.

    सादर

    समीर लाल

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